Monday, October 5, 2015

मैच फिक्सिंग ट्रेनिंग सेन्टर

सावन के अन्धे को हरा ही हरा दिखता है और क्रिकेट के अन्धे को फिक्सिंग ही फिक्सिंग। मैं सावन में तो अन्धा हुआ नहीं, क्रिकेट में हो गया। क्रिकेटान्धता की असीम अनुकम्पा से मुझे दिव्य-दृष्टि प्राप्त हुई। मेरे प्रज्ञा चक्षु अचानक खुल गए और मुझे घर-घर में, हर तरह की मैच फिक्सिंग के विविधरूपा दर्शन होने लगे।
मैच देवरानी और जेठानी नामक दो खूँखार एवं परम्परागत प्रतिद्वंद्विनियों के बीच था। अवसर था घर में सामानों का बँटवारा। खिलाडिय़ों में संघर्ष था और दर्शकों में रोमांच। पर देखते ही देखते मैच में एक नाटकीय मोड़ आया। संघर्ष और रोमांच दोनों एक साथ गायब हो गए क्योंकि अब सास नामक सामान का नम्बर था। दोनों ही मैच हार जाने की जी तोड़ कोशिश करने लगीं। क्रिकेट की भाषा में इसे कहेंगे ''डबलमैच फिक्सिंग।''
सास के पास उस बहु के साथ रहने के अलावा कोई चारा नहीं था जिसके हिस्से में उसे फिक्सिंग ने ला पटका था। बेचारी को लोक-लाज के आभूषण धारण करने का खामियाजा उठाना पड़ रहा था। लिहाजा अपने पालतू पति को विश्वास में लेकर उसे मैच फिक्स करना पड़ा। उस दिन मैच शुरू से ही रोमांचक हो चला था। जितनी सधी हुई गेंंदबाजी उतनी ही दमदार बल्लेबाजी। क्षेत्ररक्षण भी दोनों ही ओर से लाजवाब था। बहुत धैर्य से बल्लेबाजी कर रही सास की एकाग्रता अचानक भंग हुई। बस उसके मुँह से एक गलत वाक्य निकला कि ''मैं तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहती।'' पुुत्र ने तुरन्त अनुपालना कर डाली, आखिर वह आज्ञाकारी जो ठहरा। बहु को मनवांछित फल की प्राप्ति हुई। क्रिकेट की भाषा में इसे कहेंगे ''अम्पायर के जरिये मैच फिक्सिंग।''
जेठानी के लड़के का विवाह होना था। घर में भगवान का दिया सब कुछ था, इसलिए माँगा कुछ भी नहीं था। सिर्फ सेवाभावी लड़की चाहिए थी। लेकिन लड़की का बाप अतिसज्जन निकला। उसने बिना माँगे ही, मना करने के बावजूद सब कुछ दिया। कलर टी.वी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, कूलर, स्कूटर आदि। घर में बँटवारे के बाद हिस्से में आये दो कमरों वाले फ्लैट में इतनी जगह कहाँ थी कि दहेज में प्राप्त यह इतना सारा सामान रखा जा सके। मजबूरी वश लाड़ले बेटे और बहु को तुरन्त अलग करना पड़ा। बिना हिंसा और तनाव के परिवार बँट गया। लड़की के बाप का सपना साकार हुआ। क्रिकेट की भाषा में इसे कहेंगे, ''प्रायोजक द्वारा मैच फिक्सिंग।''
मैच फिक्सिंग के वातावरण में पल बढ़कर जब हमारे लाड़ले राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की शोभा बढ़ायेंगे तब उन्हें इसके लिए अतिरिक्त कोचिंग की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। घर-घर में मैच फिक्सिंग का सतत् प्रशिक्षण निर्बाध गति से जारी है। मैदान में होने वाली मैच फिक्सिंग की जाँच तो सी.बी.आई. कर लेगी पर घर-घर में हो रही ऐसी फिक्सिंग की जाँच कौन करेगा? अस्तु, राजिया का प्रसिद्ध सोरठा याद आ रहा है-
डूंगर बळती लाय, दीखे सबने सामने।
पगां बळंती हाय, रत्ती न दीखे राजिया।।

सुरेन्द्र दुबे (जयपुर)


सुरेन्द्र दुबे (जयपुर) की पुस्तक
'डिफरेंट स्ट्रोक'
में प्रकाशित व्यंग्य लेख

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